Bihar Result 2025: NDA की प्रचंड जीत के पीछे 5 बड़े फैक्टर | भाजपा, जदयू, एलजेपी, हम, RLM की सीटों की पूरी डिटेल्स
Bihar result 2025, 5 Factors behind NDA's Vistory: अब तक सामने आए रुझान अगर नतीजों में तब्दील होते हैं तो भाजपा लगातार दूसरे चुनाव में जद (यू) से बेहतर प्रदर्शन करेगी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उसके कार्यकर्ता अपने दल से किसी को 'मुख्यमंत्री' बनाए जाने की मांग उठा सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बात पर जोर देते रहे हैं कि बिहार में राजग का नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे हैं।
Bihar result 2025, 5 Factors behind NDA's Vistory: बिहार विधानसभा चुनाव में दोपहर ढाई बजे तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 200 से अधिक पर बढ़त हासिल करते हुए प्रचंड जीत की ओर बढ़ रहा है। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर दोपहर तक उपलब्ध रुझानों के अनुसार, भाजपा 101 विधानसभा सीटों में से 90 से अधिक सीटों पर बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है। भाजपा का यह प्रदर्शन उसे राजनीतिक रूप से और मजबूत करेगा और पिछले साल के लोकसभा चुनाव में मिले झटके की बहुत हद तक भरपाई करेगा।
दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा के लगातार शानदार प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में बिहार विधानसभा चुनाव के यह रुझान सामने आए हैं। इस चुनाव में जनता दल (यूनाईटेड) को भी काफी फायदा मिलता दिख रहा है। साल 2020 के चुनाव में केवल 43 सीटें जीतने वाली नीतीश की पार्टी इस बार 80 से अधिक सीटों पर आगे है। खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ बताने वाले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) लगभग 20 सीटों पर आगे है।
एनडीए के प्रचंड जीत को इन 5 फैक्टर्स का समर्थन
1- लगभग दो दशकों से बिहार की बागडोर संभाल रहे नीतीश कुमार के लिए, यह चुनाव व्यापक रूप से राजनीतिक सहनशक्ति और जनता के विश्वास की परीक्षा माना जा रहा था। बिहार को तथाकथित "जंगल राज" के दौर से बाहर निकालने के लिए कभी "सुशासन बाबू" कहे जाने वाले मुख्यमंत्री को आखिरकार मतदाताओं ने उनके शासन मॉडल पर भरोसा जता रहे हैं।2- इस चुनाव में एनडीए मोर्चे ने स्थिर, विकास और कल्याणकारी स्कीम्स को अपना हथियार बनाते हुए पेश किया। पीएम मोदी के नीतीश कुमार के साथ प्रचार करने से, गठबंधन ने राष्ट्रीय अपील को मजबूत जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा। प्रमुख चुनावी वादे बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं और प्रशासनिक दक्षता पर केंद्रित थे, जो सभी समुदायों के मतदाताओं को प्रभावित किया।
3- अक्सर विपक्ष द्वारा "दलबदलू" के नाम से टारगेट में रहे नीतीश कुमार ने ठोस विकास पर फोकस करते हुए अपना राजनीतिक आधार बनाए रखा। ग्रामीण बुनियादी ढांचे, नागरिकों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता और समावेशी नीतियों में उनके प्रशासन की पहलों ने व्यापक विश्वास अर्जित किया है, जिससे उनकी छवि एक ऐसे नेता के रूप में मज़बूत हुई है जो बयानबाज़ी के बजाय परिणाम देता है।
4- साल 2025 के चुनाव बिहार की चुनावी प्रक्रिया के विकास को भी दर्शाते हैं। कभी बड़े पैमाने पर हिंसा और बार-बार पुनर्मतदान से प्रभावित, इस वर्ष का मतदान शांतिपूर्ण रहा, जिसमें एक भी दोबारा वोटिंग की नौबत नहीं आई और कोई बड़ी घटना नहीं हुई, जो राज्य की लोकतांत्रिक प्रगति के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया है।
5- नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों से भी ज्यादा लंबा है, जो 1970 के दशक के मध्य में जेपी आंदोलन से शुरू हुआ और पिछड़ी जाति की राजनीति और धर्मनिरपेक्ष शासन की एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में उभरा। उनके अनुभव और विकास को सामाजिक समावेशिता के साथ संतुलित करने की क्षमता ने उन्हें मुसलमानों सहित विभिन्न समुदायों का समर्थन बनाए रखने में मदद की है।
बहरहाल, ऐतिहासिक रूप से, बिहार ने लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के लिए मजबूत समर्थन दिखाया है। 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों से लेकर 2020 और अब 2025 के विधानसभा चुनावों तक, मतदाताओं ने लगातार उन गठबंधनों को तरजीह दी है जो स्थिर शासन और आर्थिक विकास का वादा करते हैं।
राज्य अंतिम नतीजों का इंतजार कर रहा है। रुझानों से स्पष्ट है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में और भाजपा के समर्थन से एनडीए को निर्णायक जीत मिलने की संभावना है। रणनीतिक प्रचार, मजबूत गठबंधन और शासन-केंद्रित नेतृत्व के संयोजन ने मतदाताओं के दिलों में जगह बना ली है, जिससे बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है।
अन्य पार्टियों का हाल
पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी का तमगा हासिल करने के बावजूद प्रमुख विपक्षी पार्टी रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक दिख रहा है और वह 30 से कम सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राजद ने इस चुनाव में 140 से भी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था। 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस दहाई के आंकड़े तक पहुंचने में विफल होती दिख रही है।अब तक सामने आए रुझान अगर नतीजों में तब्दील होते हैं तो भाजपा लगातार दूसरे चुनाव में जद (यू) से बेहतर प्रदर्शन करेगी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उसके कार्यकर्ता अपने दल से किसी को 'मुख्यमंत्री' बनाए जाने की मांग उठा सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बात पर जोर देते रहे हैं कि बिहार में राजग का नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे हैं।
दिग्गज नेताओं में कौन आगे-कौन पीछे?
भाजपा के प्रमुख उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (तारापुर) और विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय) शामिल हैं, जो अपनी-अपनी सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव भाजपा के सतीश कुमार से करीब 100 मतों के मामूली अंतर से पीछे हैं। उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव, जिन्हें उनके पिता लालू प्रसाद ने कुछ महीने पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया था, बगल की महुआ विधानसभा सीट पर चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं।यहां देखें लाइव -

